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Saturday, February 3, 2018

अकाल और उसके बाद : बाबा नागार्जुन

"एक कविता रोज़ का डोज़" में आज पढ़िए.. बाबा नागार्जुन की एक कविता


नागार्जुन (३० जून १९११-५ नवंबर १९९८) हिन्दी और मैथिली के अप्रतिम लेखक और कवि थे। उनका असली नाम वैद्यनाथ मिश्र था परंतु हिन्दी साहित्य में उन्होंने नागार्जुन तथा मैथिली में यात्री उपनाम से रचनाएँ कीं। 


अकाल और उसके बाद


कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास

कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पास

कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त

कई दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त.

दाने आए घर के अंदर कई दिनों के बाद

धुआँ उठा आँगन के ऊपर कई दिनों के बाद

चमक उठी घर भर की आँखें कई दिनों के बाद

कौए ने खुजलाई पाँखें कई दिनों के बाद.

अगर आपको हमारी कृतिया पसंद आ रही हैं तो हमें कमेंट कर बताएं या अगर आप किसी और कवि को पढ़ना चाहते हैं तो आप हमें kadakmijaji@gmail.com पर मेल भी कर सकते हैं।


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