मैंने तुम्हें जब भी देखा है यही सोचता हूं कि कोई इतना क्यूट कैसे लग सकता है? तुम्हारें सौंदर्य में गजब का आकर्षण है. श्रृंगार नहीं करती तुम, कभी देखा भी नहीं. लेकिन सोचता हूं कि कितनी प्यारी लगेगी तुम्हारे दोनों भवों के बीच में एक छोटी सी बिंदी.
कानों में बालियां पहन जब तुम इठलाओगी, तो उस सौंदर्य पर कितने लोग मर मिटेंगे. पर क्या फर्क पड़ता है, तुम किसी भी श्रृंगार के बिना ही निखरती रहती हो. तुम्हें किसी दिखावे की जरूरत नहीं. तुम अद्भुत हो प्रिये..
इसके गवाह रात के सपने हैं, जिनमें मैं तुम्हें पाता हूं. तुम कुछ कहती नहीं. लेकिन तुम्हारी वो प्यारी मुस्कान बहुत कुछ महसूस करा देती है और मैं मोह में फंस जाता हूं. मैंने तुम्हें कई दफा ख्वाबों में देखा है. कभी तुम्हारे चेहरे पर गुस्से का भाव, तो कभी मुझे डांटते हुए, कभी दोनों भवों के बीच सिकुड़न को महसूस किया, जैसे कोई बात हो तुम्हारे अंदर. लेकिन तुम उसे बाहर नहीं आने देना चाहती.
मैं भी कुछ नहीं पूछता, बस उस जगह चूम लेता हूं. क्योंकि मुझे तुम्हारे चेहरे पर कुछ नहीं चाहिए, न बिंदी, न लाली और ना ही किसी प्रकार का श्रृंगार, बस एक तुम्हारी वो प्यारी मुस्कान. क्योंकि वो तुम्हारे सौंदर्य को पूरा करती है.

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