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Sunday, July 15, 2018

झूठी शान के चक्कर में हमने अपनी अच्छी आदतों को खो दिया हैं।

कुछ दिनो पहले विश्व के ज़्यादातर समाचार पत्रों मे एक समाचार था की जो बोतलबंद पानी हम ख़रीद कर पीते है, उसमे माइक्रो प्लास्टिक अथार्थ प्लास्टिक के अत्यंत महीन कण होते है जो हमारी सेहत और पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक होते है। आपको याद होगा की कुछ वर्षो पहले हम सभी के घर मे पानी का एक बर्तन होता था, जिसका उपयोग घर हर सदस्य करता था, जब भी हम घर से बाहर जाते थे तो उस बर्तन या बोतल मे पानी ले जाते थे। फिर हमे धीरे धीरे घर से इस बर्तन को ले जाने मे शर्म आने लगी, और बाहर से बीस रुपए की पानी की बोतल खरीदना हमारी शान का हिस्सा बन गया।

ऐसे कई उदाहरण है, जैसे हमे घर से पचास रुपए का थैला अपने हाथ मे ले जाकर सामान लाने से अच्छा पचास पैसे की थैली मे सामान लाना अच्छा लगता है, क्योंकि कही ना कही हमारे अज्ञानी मन को लगता है की हाथ मे झोला लेना हमारी शान के खिलाफ है। हो सकता है की हम पिछड़े है, हमे बहुत कुछ सीखना है, परंतु ऐसा भी नहीं की हमारी हर बात गलत हो। कभी सोचिएगा कि अगर आज हर भारतीय पहले जैसे थैला लेकर चलता, घर से पानी लेकर चलता तो आपको आपका देश कैसा लगता, इतना ही गंदा जैसा अभी? 

कुछ दिनों पहले एक समाचार था की जर्मनी की किसी कंपनी ने पेड़ के पत्तों से बर्तन बनाने चालू किए जो की पर्यावरण के लिए नुकसानदेह नहीं है, पढ़ कर हँसी आई खुद पर और खुद के गाँव पर की, आज हमारे गाँव मे पत्तलों की जगह प्लास्टिक ने ले ली है। जो पत्तले गाँव के एक ग़रीब को आय का साधन और खेत को खाद देती थी आज उसकी जगह किसी कंपनी के प्लास्टिक ने ले ली है, जो सिर्फ और सिर्फ नुकसान ही करती है। 

आप अगर ध्यान से सोचेंगे तो पायेंगे हम कहा खो रहे है, तालाब और पेड़ हमारी हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा हुआ करते थे , जिनके अनेक फायदे थे, वो हमारे जल स्तर को बनाए रखते, वातावरण के साथ आय का साधन भी थे। आज हमारे गाँव के तालाब या तो गंदे है या खत्म होने वाले है, पेड़ो की बात तो छोड़ ही दीजिये। ऐसी अनेक बातें है जो हमे  विरासत मे मिली थी, जिन्हे विश्व अपने रहा है और हम खो रहे है। 

विश्व के पच्चीस सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर मे सोलह शहर हमारे देश के है, गावों की भी स्थिति वैसे ही होते जा रही है। यह स्थिति चिंतनीय है, तथा इसके कई कारण हो सकते है, परंतु उसमे प्रमुख कारण हमारी पुरातन अच्छी आदतों से विमुख होना है।


डिसक्लेमर : ऊपर व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं।

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