मुझे नही पता की सैराट फिल्म कैसी हैं? लेकिन मैं इतना कहूंगा की धड़क एक अच्छी फिल्म हैं। अक्सर किसी फिल्म के रीमेक बनने पर हम उसे कम तवज्जो देने लगते हैं जबकि कहानी के अलावा उसमे भी सबकुछ ओरिजिनल ही होता हैं। जहान्वी और ईशान का अभिनय ओरिजिनल हैं, अमिताभ के लिखे गाने, अजय अतुल का संगीत और शशांक का निर्देशन भी बेहद संतोषप्रद हैं।
मैं देख रहा हूँ की पिछले कई दिनों से यह फिल्म सैराट से तुलनात्मक प्रतिद्वंदता का शिकार हो रही हैं। मैंने भी फिल्म सैराट की लोकप्रियता से प्रभावित होकर ही देखनी चाही..लेकिन देखने के पश्चात दिल से आवाज़ आई की सारा क्रेडिट सैराट को न देकर..थोड़ा क्रेडिट धड़क को भी दिया जाए।
कुछ लोगो द्वारा जहान्वी के अभिनय को बिलकुल ही नापसन्द किया जा रहा हैं। लेकिन पहली फिल्म होने के बावजूद मुझे उसका काम पसन्द आया। पसंद आने की एक और भी वजह हैं उसकी ख़ूबसूरती, उसकी क्यूटनेस...एकदम 18 साल की श्रीदेवी के माफिक।
चूँकि मैंने सैराट नही देखी हैं इसलिए फिल्म की क्लाइमेक्स ने मुझे थोड़ा सा चौकाया। लेकिन मैं दाद देता हूँ शशांक को जिसने बॉलीवुड के टिपिकल हैप्पी एंडिंग को तरजीह न देकर समाज की कड़वी सच्चाई से प्रेरित उस मराठी कहानी में फेरबदल करने की बिल्कुल भी नही सोची। मराठी सिनेमा अपने आप में एक अलग दर्जे का हैं लेकिन बॉलीवुड में इस तरह का रिस्क लेने के लिए शशांक सैल्यूट के हकदार हैं।
प्रेम के प्रति परिवार का रवैया और सामाज की सोच... सैराट/धड़क जैसी फिल्मों के माध्यम से हमें यह एहसास दिलाने में कामयाब होती हैं कि जिस प्रेम से पूरी दुनिया को जीता जा सकता हैं उस प्रेम के लिए यहाँ कोई जगह नही हैं।
✍️आशीष




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