अब तक ये जानकारी आपको किसी ने नहीं दी होगी .
अविभाजित मध्यप्रदेश में 1998 में विधानसभा चुनाव हुए कुल सीट थी 320. जिसमें कांग्रेस को 172 सीटों के साथ सत्ता हासिल हुई। बीजेपी को 119 सीटें हासिल हुई और वो मुख्य विपक्षी पार्टी बनी। बहुजन समाज पार्टी को 11, समाजवादी पार्टी को 4 और बाकी सीट निर्दलीयों ने हासिल की।
फिर 1 नवम्बर 2000 को छत्तीसगढ़ अलग राज्य बना। छत्तीसगढ़ को 320 में 90 विधानसभा सीटें मिली। अब छत्तीसगढ़ में सरकार का गठन किया जाना था तो 90 सीटों में कांग्रेस के 49 विधायक, बीजेपी के 36 विधायक, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के 1 विधायक, बहुजन समाज पार्टी के 2 विधायक और 2 निर्दलीय विधायक थे।
कांग्रेस के पास बहुमत था तो जाहिर है कि पहली सरकार उसी की बननी थी। कांग्रेस विधायक दल की मीटिंग हुई और नेता चुने गए अजीत जोगी। इसके विरोध में कांग्रेस के कद्दावर नेता और मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार विद्याचरण शुक्ल ने इस्तीफा दे दिया और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में अपने समर्थकों के साथ शामिल हो गए।
इस प्रकार अजीत जोगी ने छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। अजीत जोगी उस समय विधायक नहीं थे उनके पास 6 महीने का समय था विधायक बनने के लिए। उनके लिए मरवाही के तत्कालीन बीजेपी विधायक रामदयाल उइके ने अपनी सीट छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गए। अजीत जोगी मरवाही विधानसभा के उपचुनाव में भारी मतों से जीतकर विधायक बने। उस समय ख़बर यह भी थी कि अजीत जोगी ने बीजेपी के 12 विधायकों की खरीद-फ़रोख़्त की है।
इस प्रकार छत्तीसगढ़ में प्रथम सरकार अविभाजित मध्यप्रदेश के 1998 विधानसभा चुनाव में प्रदेश के 90 विधानसभा सीटों में कांग्रेस को मिली बहुमत के आधार पर बनी। प्रथम विधानसभा चुनाव छत्तीसगढ़ में 2003 से शुरू हुए।
ये छत्तीसगढ़ के प्रथम सरकार के बारे में जानकारी थी जिसे आपने यहाँ पढ़ा । अगली बार दूसरे विधानसभा की पूरी जानकारी क साथ फिर से होंगे हम हाज़िर ।
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------


No comments:
Post a Comment
आपको यह कैसा लगा? अपनी टिप्पणी या सुझाव अवश्य दीजिए।