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Thursday, December 6, 2018

(पार्ट 3):बाबरी ध्वंस से एक दिन पहले अटल जी ने ऐसा क्या कहा कि कारसेवक उग्र हो गए थे?


बाबरी ध्वंस से एक दिन पहले अटल जी ने ऐसा क्या कहा कि कारसेवक उग्र हो गए थे?

5 दिसंबर 1992 यानी कि बाबरी मस्जिद ध्वंस होने से 1 दिन पहले एक रैली को संबोधित करते हुए अटल बिहारी वाजपेयी कहते हैं कि-" सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला लिया है उसका अर्थ में बताता हूं। वह कारसेवा रोकना नहीं है। सचमुच में सुप्रीम कोर्ट ने हमें अधिकार दिया है कि हम कारसेवा करें। रोकने का तो सवाल ही नहीं है। कल कारसेवा करके अयोध्या में सर्वोच्च न्यायालय के किसी निर्णय की अवहेलना नहीं होगी। कारसेवा कर के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान किया जाएगा।

         ठीक है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब तक अदालत में वकीलों की बेंच फैसला नहीं करती आपको निर्माण का काम बंद रखना पड़ेगा। मगर सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि आप भजन कर सकते हैं,कीर्तन कर सकते हैं। अब भजन एक व्यक्ति नहीं करता। भजन होता है तो सामूहिक होता है और कीर्तन के लिए तो और भी लोगों की आवश्यकता होती है। भजन और कीर्तन खड़े-खड़े तो नहीं हो सकता। कब तक खड़े रहेंगे? वहां नुकीले पत्थर निकले हैं 1 किलो पत्थर निकले हैं। उन पर तो कोई नहीं बैठ तो कोई नहीं बैठ सकता। तो जमीन को समतल करना पड़ेगा, बैठने लायक करना पड़ेगा। यज्ञ का आयोजन होगा तो कुछ निर्माण भी होगा। कम से कम वेदी तो बनेगी।"

  5 दिसंबर की देर शाम अटल जी के भाषण सुनने के बाद,  6 दिसंबर की सुबह से ही कारसेवक अयोध्या में जमा होना शुरू हो गए थे। चारों तरफ से बाबरी मस्जिद के ढांचे को कारसेवकों द्वारा घेर लिया गया। मस्जिद की सुरक्षा में पीएसी के जवान तैनात थे। ढांचे के चारों ओर लगी लोहे की रेलिंग को पार करके कारसेवक अंदर घुसने लगे और तैनात जवानों पर पत्थर बरसाने लगे। थोड़ी ही देर में कारसेवक ढांचे के सबसे ऊपरी हिस्से यानी कि गुंबद पर चढ़ गए और पहला ढांचा उनके द्वारा गिरा दिया गया। चारों तरफ धूल ही धूल फैल गई । "राम नाम सत्य है,बाबरी मस्जिद ध्वस्त है " के नारे चारों तरफ गूंजने लगे।
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भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से कृष्ण मुरारी की रिपोर्ट 

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