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Tuesday, December 4, 2018

क्यों लुप्त हो गए डायनासोर?


डायनासोर का विलुप्त होना एक ऐसी पहेली है, जिसने वैज्ञानिकों के ध्यान को पिछली एक सदी से उलझा रखा हैं। कहा जाता है, डायनासोर लगभग 16 करोड़ वर्ष तक पृथ्वी पर राज करने वाले पहले स्थलीय कशेरुक जीव थे। ये ट्राइएसिक काल के खत्म होने के बाद से लेकर क्रिटेशियस काल के अंत तक अस्तित्व में रहें।
लेकिन क्या हुआ था 6 करोड़ 50 लाख साल पहले, जिसने धरती पर इस जीव के नामोनिशान को मिटा कर रख दिया..आइये जानते हैं? 

अमेरिका की टेक्सास टेक यूनिवर्सिटी में भू-तत्व के प्राध्यापक "शंकर चटर्जी" के शोध के अनुसार, अंतरिक्ष से 40 किलोमीटर के व्यास वाला एक पिंड पृथ्वी से भारत के हिस्से में आ टकराया था जिससे हाईड्रोजन बम विस्फोट से 10 हजार गुना अधिक असर हुआ। सुनामी आई और पृथ्वी पर कई ज्वालामुखी फट पड़े। महीनों तक आसमान में गैस की परतें छाई रहीं-अंधेरा छाया रहा। इतने दिनों तक सूर्य की किरणें पृथ्वी तक नहीं पहुंच सकीं और चरम खाद्य संकट आ खड़ा हुआ। ऐसे में भुखमरी के चलते पृथ्वी के भारी-भरकम जीव नष्ट हो गए। शिकागो या मेक्सिको में बने हजारों किलोमीटर के व्यास वाले गड्ढे ही डायनासोरों के लुप्त होने के प्रमाण हैं। लेकिन कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार इनका विलुप्त होने का कारण प्रचंड ज्वालामुखी विस्फोट था।


हम डायनासोर के विलुप्त होने के लिए कैसे गणना करते हैं? ठीक उसी तरह जिस तरह से अनुमानित 20,000 से 2 लाखों प्रजातियों के विलुप्त होने के लिए गणना की जाती है। जैसे कुछ वैज्ञानिकों का यह विश्‍वास है कि पिछली शताब्दी में ही — जलवायु परिवर्तन और मानव प्रजातियों के प्रसार के संयोजन के कारण डायनासोर विलुप्त हो गये। यदि मनुष्य और डायनासोर एक साथ रहते थे, तो उनमें निश्चित रूप से कुछ घटित हुआ होगा। मनुष्यो ने उनका शिकार किया और उन्हें खाने के लिए पका लिया। कई किंवदंतियों और प्राचीन कलाकृतियाँ ठीक वैसी ही हैं, जैसा हम वास्तव पाते हैं। मनुष्यों ने विशाल सरीसृप का शिकार कर लिया और उन्हें मार दिया। शेर, बाघ और भालू इत्यादि डायनासोर की तुलना में बहुत अधिक बुरे नहीं थे ..इसलिए, वे अभी भी हमारे आसपास ही हैं।

हो सकता है कि उनमें से कुछ अभी भी संसार के दूरस्थ स्थानों में जीवित हो, ऐसे स्थान जो अभी तक हमारी जनसँख्या के नियन्त्रण में पूरी तरह से नहीं आए हैं, और इस बात के लिए प्रत्येक वर्ष सैकड़ों प्रमाण हमें देखने को मिलते हैं। कुछ तर्क यह भी हैं कि काल के स्वाभाविक प्रवाह में जीवों के स्वरूप बदलते गए या खुद ब खुद जीव नष्ट होते गए और नई प्रजातियाँ पैदा होती गईं। पृथ्वी पर 10 करोड़ साल तक राज करने वाले डायनासोरों के जीवाश्म अब भी उस युग की कहानियां सुनाते हैं। लेकिन कौन सी कहानी सच हैं, कौन से प्रमाण यथार्थ हैं..यह अब भी एक रहस्य का विषय बना हुआ हैं। इसके संबंध में आज भी वैज्ञानिकों के पास कोई पुख्ता जानकारी मौजूद नही हैं। 


डायनासोर के लुप्त होने की क्या वजह थी, क्या नही.. इनका लुप्त हो जाना सही था या गलत, इनके लुप्त होने में मानव जाति को दोषी ठहराया जा सकता है या नही..इसपर तो हम कुछ नही कह सकते। लेकिन वर्तमान परिदृश्य का सच तो यही है कि मनुष्यों के स्वार्थ ने लाखों करोड़ो जीव जंतुओं को लुप्त होने के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया हैं। और शायद हम यह बात भूल चुके है कि "अर्थ इज़ नॉट ओनली फॉर ह्यूमन'।

नोट - ऊपर दी गयी गयी तमाम जानकारी किसी भी प्रकार के सत्यता की पुष्टि नही करती हैं। यह जानकारी इंटरनेट के विभिन्न स्रोतों व लेखक की अपनी समझ पर आधारित है।

कौशलेंद्र यादव(हिंदी पत्रकारिता)

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