लुटेरा, एक फिल्म जो कुछ भी हो सकती थी। लव, क्लासिक, कल्ट या फीचर, उसका जॉनर कुछ भी हो सकता था। पर उसने प्रेम का प्रायश्चित बनना पसंद किया। एक लड़का जिसे एक ऐसे इंसान का उधार चुकता करना है जिसने उसे ज़िंदा रखा। ज़िंदा रखने से अधिक तो यह धरती भी कुछ नहीं देती किसी को। एक लड़की जिसे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं कि प्रेम करने में दिल टूटने की भी उतनी ही प्रायिकता बन जाती है। रणवीर इससे ज़्यादा शांत किसी फिल्म में नहीं दिखे। सोनाक्षी इससे ज़्यादा खूबसूरत किसी फिल्म में नहीं दिखी। कलकत्ता, डलहौज़ी और द लास्ट लीफ के अंश लेकर विक्रमादित्य मोटवानी क्या बना रहे थे उन्हें भी अंदाज़ा नहीं होगा। सिंगर बनने का सपना छोड़ गीतकार बने अमिताभ भट्टाचार्या क्या लिख रहे थे इसका अंदाज़ा शायद ही उन्हें कभी हो।
एक लड़की जिसकी जिंदगी में प्यार और नफरत दोनों नहीं बची। अपनी नाउम्मीदी को कागज़ पर उतार उतारकर थक जाने के बाद वो बस खत्म हो जाना चाहती है। जीने की वजह के नाम पर पेड़ का एक अंतिम पत्ता है जिसके टूटने का वो हर रोज़ इंतज़ार करती है। पर मरने का इंतज़ार कर रही ये लड़की कभी किसी लुटेरे के जीने का एक अंतिम मौका थी जिसे उसने गवां दिया। और फिर पूरी ज़िदगी पश्चाताप करता रहा। वो लुटेरा जो उस अंतिम पत्त्ते को जिसके भरोसे लड़की ज़िंदा है उसे फोटोसिंथेसिस के भरोसे नहीं छोड़ता। उम्मीद और कोशिश दुनिया के सबसे शक्त्तिशाली शब्दों में से हैं। रणबीर ने उम्मीद और कोशिश दोनों के सहारे उस पत्त्ते को ज़िंदा रखा और दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ पाई, माफी।
टीबी में बदल चुके दमे से परेशान एक लड़की क्या ही गुस्सा कर सकती थी। अपनी जान और चंद इंजेक्श्नों के अलावा कुछ था भी तो नहीं उसकी जिंदगी में। पर जिन हालातों में सोनाक्षी रणवीर को माफ करती हैं वो सबसे प्यारा है। पहाड़ कई मायनों में खास होते हैं। बर्फ की सफेद चादर में लिपटे पहाड़ तो और भी ज्यादा। फिल्म का दूसरा हिस्सा स्लो है, इतना स्लो कि उसे आप अपनी ज़िंदगी समझ बैठते हैं। डायलॉग के नाम पर अंधेरे कमरे से बाहर की सफेद बर्फ और ठंडी हवा से टकराते पेड़ नज़र आते हैं या हर रात उम्मीद के पेड़ पर अपनी कोशिश लटका कर बर्फ से तर-ब-तर रणबीर।
एक सोती हुई लड़की को मद्धिम रोशनी के बीच एकटक देखने से खतरनाक कुछ नहीं है। न विरह, न दिल का टूटना और न मरना। रात की ये तस्वीर आपको धीमे-धीमे मारती है। ऐसे जैसे कुछ हुआ ही न हो पर सब हो चुका हो। कई बार सांस लेना बोझिल हो जाता है। लड़कों के पास धड़कन रोकने की शक्त्ति भी होनी चाहिए ताकि वो कई आंखों को नींद टूटकर खुलने से रोक सके।जुड़े रहिये हमारे फेसबुक पेज कड़क मिजाजी से

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