बारिश के वो चंद लम्हें - KADAK MIJAJI

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Saturday, April 11, 2020

बारिश के वो चंद लम्हें


रोज़ नए चेहरे मिलते हैं, गुज़र जाते हैं
जवाबों की तलाश में कदम उठते हैं और थम जाते हैं
साल बीते, महीने और हफ्ते और दिन भी
सारी मुस्कुराहटें, शिकवे और ख्वाब मैंने अपने अंदर समेट लिए
कुछ रास्ते तय किए कुछ करना बाकी भी है
तुम्हारे कदमों की आहट में अक्सर 
दिल पे कई मौसम गुज़रे
सर्द हवा को, खिलखिलाती धूप को, बहारों को 
बरस दर बरस
बदलते देखा है मैंने
लेकिन फिर भी
ना जाने क्यों?
याद है मुझे सिर्फ बारिश के वो चंद लम्हें ...

सौम्या मेहरोत्रा की कलम से 


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