स्टेट्समैन,युगपुरुष,दूरद्रष्टा व अनेक विशेषणधारी महान नेता श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी की मृत्यु हम सभी हिंदुस्तानियों के लिए दुखद है।वर्तमान में शायद वो एकलौते नेता थे जिनको हिंदुस्तान की सम्पूर्ण अवाम प्यार करती थी। वो जनता चाहे किसी भी जाति,धर्म,समुदाय या राजनीतिक पार्टी को मानने वाली रही हो लेकिन इस नेता के लिए उनके दिल मे निश्छल प्रेम था।इस बात का अंदाजा,उनकी अंतिम यात्रा में जुटी भीड़ से निकाला जा सकता था जो शायद 21वीं सदी में किसी भी राजनेता की अंतिम यात्रा में सबसे बड़ी भीड़ थी।
अब मैं आगे की पंक्तियों में जो लिखने जा रहा हूँ वो शायद अधिकतर लोगों को पसंद न आये।16 अगस्त को अटल जी की मृत्यु के बाद पूरे देश मे शोक का माहौल था।उनकी अंतिम यात्रा के बाद जगह जगह पर देश भर में लोगों द्वारा श्रद्धांजली सभाओं का आयोजन किया गया। हरिद्वार में 19 अगस्त को अस्थि विसर्जन किया गया।स्वयं भारतीय जनता पार्टी द्वारा 20 अगस्त को इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में सर्वदलीय शोकसभा का आयोजन किया गया।यह भी बहुत अरसे के बाद देखने को मिला कि किसी अनऔपचारिक समारोह में सभी नेताओं ने पार्टी से ऊपर उठकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई जो हमारे देश के लोकतंत्र की खूबसूरती को दर्शाता है।
अफसोस वहां पर होता है जब प्रधानमंत्री जी व सत्ताधारी पार्टी के अध्यक्ष ये ऐलान करते है कि अटल जी की अस्थियों की कलस यात्रा देश के हर राज्य और जिले में निकली जाए।उनके इस ऐलान के पीछे का मकसद साफ साफ नजर आता है कि सत्ताधारी पार्टी शोक मनाने के बाद ये कार्यक्रम करके उसका राजनीतिक लाभ लेना चाहती है।लेकिन शायद उनको इस बात का अहसास नही कि उनके इस कार्यक्रम से अटल जी की आत्मा को जरूर दुःख पहुँच रहा होगा क्योंकि जब देश भर में जगह जगह पर कलश यात्राएं निकाली जा रही है तो अनेक प्रकार के शर्मनाक और हतप्रभ करने वाले दृश्य देखने को मिल रहे है।
22 अगस्त को छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा मे 2 मंत्री बृजमोहन अग्रवाल और अजय चंद्राकर ठहाके लगाते नजर आ रहें है तो 23 अगस्त को लखनऊ में निकली कलश यात्रा में मौजूद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने न केवल पुलिस चौकी पर हमला किया बल्कि दरोगा के साथ धक्कामुक्की करके अपने आरोपी साथी को छुड़ा लिया।
एक जगह देखने को मिलता है कि अटल जी के अस्थि कलश को प्रवाहित करने के बजाय उसको नदी में किनारे से फेक दिया जा रहा है तो कही पर देखने को मिलता है नेतागण कलश को हाथ मे लेकर मुस्कराते हुए सेल्फी लेते नजर आ रहे है।इसी तरह की अन्य घटनाये आप लोगों ने अपने आस पास भी देखी होंगी।
प्रधानमंत्री महोदय एवं अध्यक्ष जी हिंदुस्तान के हर नागरिक को अटल जी से प्यार है और शायद सभी ने अपने अपने तरीके से शोक व्यक्त किया और उनको श्रद्धाजंली अर्पित किया।श्रीमान श्रद्धाजंली और शोक व्यक्त करना ये अंतरात्मा से उत्पन्न भावनाएं है।इन भावनाओं को फरमान जारी करके नहीं जागृत किया जा सकता है।यही कारण है कि आज ये शर्मनाक घटनाएं देखने को मिल रही है।
अटल जी हमें खेद है।भगवान आपकी आत्मा को शांति दें।🙏🙏🙏


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