किसी ने बोला "मी टू" पर लिखो, तनुश्री-नाना विवाद पर लिखो। मैं पूछता हूँ..क्या जरुरत हैं इसपर बात करने की, लिखने की। जहाँ देखो सोशल मीडिया पर 20 दिन से लगभग यही दिखाई दे रहा हैं। सच्चाई क्या हैं, क्या नही हैं..यह नाना और तनुश्री के अलावा क्या कोई जानता हैं? क्या पता नाना सही हो, तनुश्री गलत..या फिर तनुश्री सही हो नाना गलत। सोच कर देखिये, कुछ भी हो सकता हैं। शायद तनुश्री खुद को चर्चा में लाने के लिए ऐसा कर रही हो, या शायद नाना भी दूध के धुले हुए न हो।
व्यक्ति में हर क्षण बदलाव होते हैं। कोई दोराय नही की नाना एक मंझे हुए अभिनेता और थोड़े बहुत समाजसेवी भी हैं। लेकिन इसका मतलब यह नही की 10 साल पहले भी उनका व्यक्तित्व ऐसा ही रहा हो। तनुश्री ने अपने समय में ज्यादातर हॉट व सेक्सी सीन दिए हैं, लेकिन इसका मतलब यह नही की वह चरित्रहीन हो। कभी-कभी जो दीखता हैं वो होता नही, और जो होता हैं वो दीखता नही।
न मैं नाना को दोषी मानूंगा और न तनुश्री से मेरी कोई हमदर्दी हैं। क्योंकि बॉलीवुड अपने आप में एक जंगल हैं जहाँ खूबसूरत वादियों के साथ साथ, जमीन के अंदर धंसा देने वाले दलदल भी हैं। जब आपके आसपास ऐसी चीज़े हो रही हैं, किन्ही सामान्य लोगो के साथ ऐसी चीज़े हो रही हैं, वह चाहे महिला हो या पुरुष या फिर बच्चे..तब बात कीजिये, उनका साथ दीजिये, हो सके तो उनके लिए लड़िये। जहाँ सच आपने महसूस किया हैं, देखा हैं, वहां अपनी आवाज़ बुलंद कीजिये। लेकिन जहाँ सच आपके पसंद, आपकी सोच व आपके कुतर्क पर अधारित हो, वहां इन तरह के फ़िज़ूल बहसों का कोई औचित्य नही।
हो सके तो अब यह अपना "मी टू' अभियान बंद कर दे।

No comments:
Post a Comment
आपको यह कैसा लगा? अपनी टिप्पणी या सुझाव अवश्य दीजिए।