सबसे असफल प्रेमी होते हैं लेखक, कवि या साहित्यकार
सबसे असफल प्रेमी होते हैं लेखक, कवि या साहित्यकार ,
यह कहना जितना आसान है
स्वीकारना उतना ही कठिन
यह कहना जितना आसान है
स्वीकारना उतना ही कठिन
एक लेखक,
जो लिख चुका होता है उन तमाम बातों को
जिसे लिखना अब तक गुनाह था
जो लिख चुका होता है उन तमाम बातों को
जिसे लिखना अब तक गुनाह था
एक कवि ,
जो कैद कर चुका होता है
उन तमाम संवेदनाओं , लम्हों ,चांद , सितारों को अपनी कविता में
एक साहित्यकार ,
जो खेलता है शब्दों के भँवर से
अपनी अनगिनत रचनाओं के संसार में,
जो कैद कर चुका होता है
उन तमाम संवेदनाओं , लम्हों ,चांद , सितारों को अपनी कविता में
एक साहित्यकार ,
जो खेलता है शब्दों के भँवर से
अपनी अनगिनत रचनाओं के संसार में,
हो जाता है सबसे असफल प्रेमी
प्रेम में पड़कर,
प्रेम में पड़कर,
उस प्रेम में पड़कर
जिसकी उलझी जुल्फों को सँवारता है एक लेखक
अपने लेख से
उस प्रेम में पड़कर
जिसके विरह को खूबसूरत बनाने का जिम्मा होता है
एक कवि पर
उस प्रेम में पड़कर
जिसकी परतों को आहिस्ता आहिस्ता खोलता है
एक साहित्यकार
जिसकी उलझी जुल्फों को सँवारता है एक लेखक
अपने लेख से
उस प्रेम में पड़कर
जिसके विरह को खूबसूरत बनाने का जिम्मा होता है
एक कवि पर
उस प्रेम में पड़कर
जिसकी परतों को आहिस्ता आहिस्ता खोलता है
एक साहित्यकार
पर आखिर सबसे असफल प्रेमी इन्हें ही क्यों कहा गया?
सबसे असफल प्रेमी , प्रेम पर लिखने वालों को ही क्यों कहा गया ?
सबसे असफल प्रेमी , प्रेम पर लिखने वालों को ही क्यों कहा गया ?
क्योंकि शायद प्रेम का
अपने सबसे सरल रूप में होना ही
सबसे मजबूत होना होता है ,
बिना शर्तों के
बिना परतों को हटाए,
अपने सबसे सरल रूप में होना ही
सबसे मजबूत होना होता है ,
बिना शर्तों के
बिना परतों को हटाए,
पर एक लेखक, कवि, साहित्यकार भूल जाता है, कि
वो भी एक इंसान है
वो खोलने लगता है प्रेम की परतों को
उस कस्तूरी की तलाश में
जो असल में उसकी परतों में ही छिपी है ,
वो भी एक इंसान है
वो खोलने लगता है प्रेम की परतों को
उस कस्तूरी की तलाश में
जो असल में उसकी परतों में ही छिपी है ,
और इस तरह लेखक, कवि व साहित्यकार
कर देते हैं उस प्रेम को खोखला ,
और बन जाते हैं दुनिया के सबसे असफल प्रेमी।
कर देते हैं उस प्रेम को खोखला ,
और बन जाते हैं दुनिया के सबसे असफल प्रेमी।
-गुंजन गोस्वामी
गुंजन गोस्वामी

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