●अमेरिका द्वारा ईरान पर प्रतिबंध लगाने के मायने?
अमेरिका ने 5 नवंबर को एक बार फिर ईरान पर कई कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं । 2016 में हुआ परमाणु समझौता जिसे ज्वाइंट एंड कंपलीट एक्शन प्लान का नाम दिया गया, अमेरिका ने इसी साल मई में उससे अलग होने का फैसला कर लिया था। समझौते से अलग होने के बाद अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की धमकी दी और ईरान के साथ सहानुभूति रखने वाले देशों को भी चेतावनी दी ।
क्या था ज्वाइंट एंड कंपलीट एक्शन प्लान??
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यह प्लान अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश थी, जिससे ईरान अपने परमाणु ताकत को ना बढ़ा सके। इस समझौते के तहत ईरान को अपने यूरेनियम के भंडार और यूरेनियम केंद्रों की संख्या को कम करना था। समझौते के तहत शोध और विकास के कार्यक्रम सिर्फ ईरान के शहर नतांज में अधिकतम 8 सालों तक किया जा सकता था। वहीं ईरान के दूसरे शहर फौर्डो में अगले 15 सालों तक इस पर रोक लगाने की बात कही गई थी।
अमेरिका ने क्यों तोड़ा समझौता ??
अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के नेतृत्व में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे लेकिन मौजूदा राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर समझौते के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप लगाकर इससे अलग हो जाने का फैसला कर लिया ।
समझौते में रूस ,चीन, ब्रिटेन, फ्रांस ,जर्मनी और तेहरान भी शामिल थे।
इस समझौते से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद हसन रूहानी ने कहा कि अगर दूसरे सहयोगी देश सहयोग बनाए रखते हैं तो ईरान इस समझौते से पीछे नहीं हटेगा ।
राष्ट्रपति हसन रूहानी ने अमेरिका के समझौते तोड़ने के बाद कहा था कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय समझौतों की अपनी प्रतिबद्धता पर कायम नहीं रहता है और उनका देश बहुराष्ट्रीय परमाणु समझौते पर डटा रहेगा।
डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले पर फ्रांस,ब्रिटेन और जर्मनी ने भी कई प्रश्न उठाए थे।
अमेरिका ने आरोप लगाया कि ईरान, सीरिया और अफगानिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और क्षेत्र शांति को भंग कर रहा है।
अमेरिका ने ईरान पर कौन से प्रतिबंध लगाए हैं और उसके क्या उद्देश्य हैं ??
5 नवंबर से ईरान पर अमेरिका के नए आर्थिक प्रतिबंध प्रभावी हो रहे हैं, इसमें ईरान के पेट्रोलियम सेक्टर पर शिकंजा कसने की कोशिश की गई है। अमेरिका को लगता है कि इन प्रतिबंधों से ईरान का रवैया बदलेगा।
अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पम्पयो ने कहा कि- "अमेरिकी राष्ट्रपति की ईरान पर स्पष्ट नीति है और यह प्रतिबंध ईरान पर लगाए गए अब तक के प्रतिबंधों में सबसे कठोर है। आतंक को बढ़ावा देने से ईरान को रोकना अमेरिका का एकमात्र उद्देश्य है।
प्रतिबंधों से ईरान पर क्या प्रभाव पड़ेगा ??
अमेरिका द्वारा लगाए प्रतिबंधों के बाद ईरान में लोगों के कई समूह अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी कर नाराजगी जाहिर करते हुए देखे जा चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इन प्रतिबंधों के जरिए ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ को तोड़ना चाहता है। प्रतिबंध लगाने के बाद तेल के निर्यात में भारी कमी आई है और प्रतिदिन 10 लाख बैरल की गिरावट आ चुकी है।
आंकड़े बताते हैं कि ईरान की मुद्रा रियाल लगातार कमजोर हो रहा है और महंगाई भी बढ़ रही है।
अमेरिका द्वारा कुछ देशों को प्रतिबंधों से छूट देने के क्या मायने हैं ??
अमेरिका ने भारत समेत आठ देशों को इरान से तेल खरीदने पर छूट दी है । ट्रम्प प्रशासन ने कहा है कि तेल के दामों को स्थिर रखने के लिए 8 देशों को छूट दी गई है। पिछले महीने तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आ गई थी । अमेरिकी प्रशासन ने छूट पाने वाले 8 देशों का नाम नहीं बताया है लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया भारत ,जापान और दक्षिण कोरिया को छूट पाने वाले देशों में बता रहा है। चीन भी कोशिश में लगा है कि उसे भी इन प्रतिबंधों से छूट मिल जाए ।
तेल के बाजार पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों से तेल की कीमतों में वृद्धि होगी ।
ईरान पर प्रतिबंध लगने से भारत पर क्या असर पड़ेगा और ईरान भारत के लिए कितना खास है ??
मौजूदा समय में ईरान ऊर्जा जरूरतों और भू-राजनीतिक तौर पर भारत के लिए बेहद अहम है।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सारा व्यापार जहां डॉलर में होता है वही ईरान भारत को रुपैया में भी तेल निर्यात करता है ।
2015 में बराक ओबामा के नेतृत्व में हुए परमाणु समझौते ने भारत के लिए ईरान के साथ रिश्तो को बढ़ाना आसान कर दिया।
इसी क्रम में प्रधानमंत्री मोदी की 2016 की ईरान यात्रा को देखा जा सकता है । चाबहार पोर्ट को विकसित करने का इरान के साथ भारत का समझौता चीन और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियों के काट के तौर पर देखा जा सकता है ।चाबहार पोर्ट के विकसित हो जाने से भारत मध्य एशिया तक ईरान के रास्ते अपना व्यापार कर सकेगा।
मार्च 2017 में भारत और ईरान के बीच कई बड़े ऊर्जा समझौते हुए थे।
इस साल जून में भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ईरान पर पूछे गए एक सवाल पर कहा था कि-" भारत ईरान पर संयुक्त राष्ट्र की पाबंदियां को मानेगा न कि अमेरिका के लगाए प्रतिबंधों को ।
अमेरिका से मिले छूट से भारत को क्या फायदा होगा??
अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से भारत में तेल के दामों में भारी वृद्धि हुई है। भारत के कई शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम ₹80 को पार कर चुके हैं जिससे जनता का सरकार के प्रति रोष बढ़ता जा रहा है। अमेरिका द्वारा दी गई छूट को मोदी सरकार के लिए तात्कालिक राहत के तौर पर देखा जा सकता है। जहां एक तरफ भारतीय मुद्रा रुपए और डॉलर की तुलना में ₹74 तक पहुंच गया है , वहीं तेल आयात बिल के बढ़ने से व्यापार घाटा भी लगातार बढ़ रहा है।
ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में क्या ट्रम्प अपने फैसले पर अड़िग रहेंगे या अपने रुख में बदलाव लाएंगे। दूसरी तरफ, पूरी दुनिया की नज़र भारत पर भी होगी क्योंकि भारत बड़ी मात्रा में ईरान से तेल आयात करता है। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध के बाद भारत क्या कूटनीति अपनाएगा इस पर भी पूरे विश्व की नज़र होगी।
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भारतीय जन संचार संस्थान , नई दिल्ली से कृष्ण मुरारी की रिपोर्ट



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