“खूब घूमिए…. लोगों से बातें कीजिये!!! हो सकता है कि आप किसी ऐसे व्यक्ति से मिल जाएं, जिसका आप अनुसरण कर सकें। ये वाक्य मेरे अध्यापक अक्सर दोहराते हैं। अब ये मेरा भी ‘मुखबन्ध’ बन चुका है। इसके साथ में एक और चीज़ ‘खूब पढ़िए’ भी जोड़ना चाहूंगा। ये बहुत आसान भी है। किसी चीज़ को पाने के लिए जरूरी नहीं कि हर बार कोई वस्तु गंवाकर उसका हिसाब चुकता किया जाए।
जीवन लंबा है लेकिन तब जब आप चुनौतियों का सामना नहीं कर पाते। भय से बाहर आएं। ज़िन्दगी की तलाश जारी रखनी चाहिए। जितना गहराई तक जाएंगे, उतना संभल पाएंगे।
शायद जिसे आप ढूंढ रहे हों, वो भी आपको ही ढूंढ रहा हो। ये सत्य है। बस धैर्य रखना बेहद जरूरी है। धैर्य और विश्वास एक ऐसी चाबी है, जिससे सभी बन्द ताले खुल सकते हैं। इसके सहारे हम अपनी सारी जिंदगी पार कर सकते हैं। मुश्किल दौर में भी बेचैन न होकर उसका सामना करना सबसे बड़ा साहस है।
लंबे छोर तक जाते रास्ते भी इस बात के गवाह हैं कि मुश्किल समय भी खत्म हो जाएगा। मंज़िल तक पहुंचने के लिए ज़रूरी है कि हम भी इन रास्तों जितना खुद को विशाल बनाएं। सीखने की ललक रखने वाला अपने आस-पास से भी सीखता रहता है। निर्जीव वस्तुएं भी हमारी ओर ही कहीं न कहीं कुछ इशारा कर रही होती हैं।
खुद को इन फूलों की तरह महकने दीजिए। एक वक्त ऐसा भी आएगा कि सभी आप पर सर्वस्व न्योछावर कर देने के लिए राजी होंगे। धूप, छांव, गर्मी और सर्दी को सहते हुए ये इतने कठोर बन चुके हैं कि इन सबका कोई असर ही नहीं रह जाता है। हम सबके पास एक पारस पत्थर है लेकिन हम या तो उसे पहचान नहीं पाते या पहचानने में देर कर देते हैं।
2013 में एक फ़िल्म आती है जिसका नाम है “भाग मिल्खा भाग”… फ़िल्म में सोनम कपूर फरहान अख्तर का साथ छोड़कर जा चुकी होती हैं और जब ये बात उनको पता चलती है तो फरहान अख्तर टूट जाते हैं। लेकिन इसके बाद जो होता है इसका अंदाज़ा शायद उन्हें भी नहीं हुआ होगा। पवन शर्मा यानी फ़िल्म में फरहान के मेंटर उन्हें समझाते हैं कि “ऊंचाई पर उड़ने वाले पंछी छोटे-छोटे पेड़ों से दिल नहीं लगाते हैं”… ये शब्द उनके लिए किसी जादू से कम नहीं थे। जिसके बाद वो अपनी राह पर लौट आते हैं। मतलब हमारे पास भी वो चीज़ है जिससे हम प्रेरणा पा सकते हैं। और मेरे पास तो है ही!!!






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