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Monday, December 3, 2018

दिल्ली तो जानते ही हो,पर ये NCR क्या है?


कुछ यूं समझिए... 
जिस तरह से हर राज्य की एक राजधानी होती है जहां से पूरे राज्य का विकास होता है, उसी तरह एनसीआर को बिन योगी/नितीश एक खुशकिस्मत राज्य मान लीजिये, जिसके विकास का संचालन नई दिल्ली से होता है| या होता भी है? कोई बात नहीं, मानने को ही कहा था| 

तथ्य ही तथ्य, चाहें तो स्किप कर लें... 
एनसीआर यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का गठन एनसीआर योजना बोर्ड अधिनियम 1985 के तहत हुआ| उस वक्त इसमें सिर्फ आठ जिले थे| जिलों से तहसीलें टूटीं, नए जिले बनते गए| इसके साथ ही कुछ अन्य जिलों को भी एनसीआर में जोड़ा जाने लगा| मौजूदा समय में एनसीआर में समूची दिल्ली के अलावा कुल 24 जिले हैं| ये 3 राज्यों- यूपी, हरियाणा और राजस्थान के कुछ चुनिन्दा जिले हैं|
  

ये जिला, शहर, तहसील में अंतर क्या है? एनसीआर इनमें से क्या है?  
समझना है तो ध्यान से पढ़िये| बात कुछ यूं है कि एक बार एक लौंडा कौनो अनजान जगह में अनजान कारणों से विचरण कर रहा था| धूप बहुत थी, काहे कि सूर्य देवता को इगनोर कर सब राम मंदिर के पीछे पड़े थे| लौंडे का कपाल भन्ना रहा था| टपरी पे उम्र गुजारी थी तो जुबान चाय और विमला पसंद को मिस कर रही थी| तभी अचानक आसमान से तेज़ प्रकाश की अन्य किरणें एकाएक उसपर पड़ीं| आवाज आई, 'वत्स, तुम इस वक्त बड़ी मुसीबत में हो|' 'तो आप ही कछु हेल्प कर दीजिये', वो तपाक से बोला| 'जाओ, तुम्हें वरदान देता हूँ| आज से यहाँ के मालिक तुम| जिस जगह का जो नाम रखना है रखो| और ये लो महीने का राशन...'
लड़का फ्रस्टिया चुका था| उसने सोचा कि उन जगहों को कुछ ऐसे नाम दिये जाएं कि आम लोग समझने में फ्रस्टिया जाएँ| इस प्रकार इजाद हुआ जिला, शहर, तहसील, तालुक, प्रांत, फलाना-ढिमका, इत्यादि| 

कल हम मिले एक तथाकथित बुद्धिजीवी से| हमारे कड़क मिजाज का संज्ञान लेते हुए उसने कड़क चाय पिलाई और बताना चालू किया:
"जिला टीम इंडिया की बैटिंग है, शहर विराट कोहली| वोट तो सब जिले में देते हैं, परफॉर्म केवल शहर करता है| तहसील के लिए लॉजिक थोड़ा अलग है| हर जिले में कुछ तहसील होती हैं| उसमें बैठता है एक गुरु आदमी- तहसीलदार| अपनी तहसील का कलेक्टर मान लो| राजस्व इकट्ठा करने से लेकर प्रशासन को भी आड़े हाथों लेता है| लगभग सारे कानूनी दस्तावेज़ जैसे स्टैम्प पेपर वगैराह सब तहसील में ही बनवाना पड़ता है|"

वैसे एक बात गांठ बांध लो| एनसीआर इन तीनों में से कौनो ना है| जैसा शुरू में ही बता दिये थे, राज्य मान के चलो|  


हर दर्द की दवा- एनसीआर
जैसे कुछ कॉलेजों में सीआर होता है, जिसपे तमाम बोझा लाद दिये जाने का रिवाज होता है| उसी प्रकार ऐसे कई राज्य हैं जो एनसीआर पे अपने तमाम जिले लाद देने की मंशा रखते हैं| योगी जी जनवरी में एक प्रस्ताव लाए थे जिसमें अलीगढ़, मथुरा, बिजनौर और हथरस को एनसीआर में शामिल करने की मांग थी| उसी तरह पंजाब सरकार भी पटियाला और मोहाली जिलों के लिए यही मांग उठाती आई है| मॉरल ऑफ दि स्टोरी इत्ती है कि अपने-अपने राज्य के जिलों की सामाजिक-आर्थिक दुर्दशा हमारे क्यूट नेताओं से देखी नहीं जाती| उनका बस चले तो पूरे देश को ही एनसीआर बना दें| हम ही लोग हैं जो हर 5 साल में उन्हें बदलवा देते हैं|

वैसे ये बड़ा तथ्य ध्यान रखिए कि किसी जिले के एनसीआर में शामिल हो जाने से वो अपने राज्य से अलग नहीं हो जाता| उसका समूचा संचालन राज्य सरकार ही करती है| फर्क सिर्फ इतना पड़ता है कि NCRPB उसके विकास के लिए केंद्र के पैसे से नई नीतियां बना सकता है|   

सोच तो बड़ी कड़ाकेदार थी
1985 अधिनियम में बात ये थी कि चूंकि एनसीआर का केंद्र दिल्ली होगा तो अन्य जिलों से दिल्ली का नेटवर्क बेहतर होगा| इससे एक दिन वो भी दिल्ली के समकक्ष हो जाएंगे| इतना ही नहीं, अधिनियम के तहत एनसीआर योजना बोर्ड (NCRPB) को एनसीआर के बाहर के जिलों को 'काउंटर मैगनेट' घोषित करने का अधिकार है| ये वो जिले हैं जहां की आबादी दिल्ली की ओर आकर्षित होने के बजाय उल्टे चुम्बकीय रूप से वहीं रह जानी चाहिए| लेकिन काउंटर मैगनेट जिले वही हो सकते हैं जिनके विकास की अपनी संभावनाएं मौजूद हों और अपने राज्य में वे धार्मिक, कूटनीतिक या पर्यावरण के प्रमुख केंद्र ना हों| आज भले ही दिल्ली की आबादी जस की तस बढ़ती जा रही हो मगर मानना पड़ेगा गुरु सोच तो बड़ी कड़ाकेदार थी!
 

NCR के बाहर के वो जिले जो काउंटर मेग्नेट कहे जाते हैं  

आगे की राह

भविष्य में और भी जिलों के एनसीआर में शामिल होने की संभावनाएं हैं| हो सकता है तब आपके जिले का मोबाइल नेटवर्क भी 'दिल्ली-एनसीआर' हो जाए| जब तक नहीं हो रहा तब तक पिच्चर देखिये, पबजी खेलिए और फिर रात को चद्दर तान के सो जाइए| ये सब करने से आप एनसीआर के पचड़े से दूर होते चले जाएंगे और आपको ज़िंदगी में परेशान करने के लिए एक चीज़ कम होगी| 


अभिषेक शुक्ला की रिपोर्ट ,भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से।




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