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Thursday, February 14, 2019

45 साल में सबसे अधिक बेरोजगारी, पर क्या है ये बेरोजगारी। आसान भाषा में जानिये हर तरह की बेरोज़गारी।



बीते 4 साल से वो मुद्दा जिसने भारतीय राजनीति को एक नई दिशा दे दी है , वो है बेरोज़गारी. हाल ही में NSSO की लीक हुई रिपोर्ट ने इस आग में घी का काम किया है . पर आखिर बेरोज़गारी या रोज़गार है क्या ? क्यों पक्ष विपक्ष बार बार बेरोजगारी क मुद्दे पर दो फांक में बंटा नज़र आता है?
जानिये आसान भाषा में हर तरह की बेरोज़गारी.

बेरोजगारी को जानने से पहले आइए हम ये जानने की कोशिश करते हैं कि रोजगार क्या होता है।रोजगार का सीधा सा मतलब यह है कि अगर कोईं भी किसी काम को कर रहा है और उस काम के बदले में उसको एक रकम मिल रही है।अब इस स्थिति को अर्थशास्त्र की भाषा में इस तरह से कहा जाता है कि अगर कोई व्यक्ति किसी भी तरह से देश की राष्ट्रीय आय में कुछ सहयोग कर रहा है तो वह व्यक्ति रोजगार कर रहा है।अब समझते हैं कि बेटोजगारी क्या होती है और यह कितने तरीके की होती है एयर बेरोजगारी या इसके बढ़ने की पीछे की क्या वजहें हो सकती हैं।


अर्थशास्त्र की भाषा में बेरोजगारी वह स्थिति है जब कोई व्यक्ति कइसी काम को एक तय बाजार कीमत पर भी करने को तैयार हो एयर फिर भी उसको कोई काम ना मिल रहा हो।अब इसको सरल तरीके से इस तरह से कह सकते हैं कि मान लीजिये किसि काम को करने की कीमत 100 रुपये है और आप उस काम को 70 रुपये में भी करने को तैयार हैं पर फिर भी आपको काम न मिल रहा हो।

अब यह जान लेते हैं कि बेरोजगारी के कितने प्रकार होते हैं।
1.मौसमी बेरोजगारी---यह दशा आम तौर पर खेती से जुड़े क्षेत्र में देखी जाती है।दरसल भारत की केवल 28%जमीन पर ही साल भर में दो या उससे ज्यादा फसलें उगाई जाती हैं,मतलब की साल के 4 से 6 महीने तक  बाकी की 72%जमीन पर खेती करने वाले किसान बेरोजगार ही रहते हैं।इसका सबसे ज्यादा नुकसान छोटी जमीन पर किसानी करने वालों को या फिर खेतिहर मजदूरों को होता है।

2. प्रछन्न बेरोजगारी---हालांकि यह नाम थोड़ा कठिन जरूर है पर इसका मतलब समझना उतना ही आसान है।कई बार बहुत सारी जगहों पर रोजगार में लगे कुछ लोगों की छटनी कर दी जाती है,जिसके पीछे यह मानना होता है कि ऐसा करने से उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ेगा,और ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि कई बार जिन लोगों की छटनी की जाती है उनके काम से वह नतीजा नहीं निकल कर आता है जिस नतीजे की उम्मीद की जाती है।

3.सामान्य बेरोजगारी----कई बार ऐसा होता है कि हम पहले से ही किसी रोजगार या नौकरी में होते हैं,पर हम उस रोजगार या नौकरी को छोड़ कर किसी दूसरे रोजगार की तलाश करने लगते हैं ऐसे में जब तक हमको कोई दूसरा रोजगार नहीं मिल जाता है तब तक हम बेरोजगार ही रहते हैं।


बेरोजगारी बढ़ने की वजह---
इसकी एक सदाबहार वजह जो कि अमूमन हमारे देश मे हर समस्या के पीछे की वजह बता दी जाती है वह है हमारे देश की बड़ी आबादी।पर आपके मन में एक सवाल यह आना चाहिए कि हमारी आबादी अभी भी चाइना से तो पीछे ही है फिर हमारी बेरोजगारी दर चाइना से ज्यादा कैसे है।तो इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि दरसल हमारे देश में काम है कम और काम करने वाले हैं ज्यादा, और इसे पीछे सबसे बड़ी वजह यह रही है है कि जो हमारा विकास रहा है उसमें हम कृषि से सेवा क्षेत्र की ओर बढ़े हैं पर हमने निर्माण क्षेत्र पर ध्यान ही नहीं दिया ।और अगर वर्तमान समय की बात की जाए तो सबसे ज्यादा रोजगार पैदा करने की सम्भावनाएं निर्माण क्षेत्र में ही हैं।

अब बात करते हैं हालिया दौर में बेरोजगारी के बढ़ने की।दरसल हालिया दौर में बेरोजगारी बढ़ने की सबसे बड़ी वजह यह रही है बहुत से लोग अपने छोटे उद्यम से हटे हैं जिस वजह से एक तो खुद उनका रोजगार जाता रहा है और उनके साथ ही साथ जिन लोगों वो रोजगार दे रहे थे उनका भो रोजगार चला गया है।और इस दशा की एक बड़ी वजह नोटबन्दी भी रही है दरसल नोटबन्दी के समय कैश की कमी के कारण बहुत से लोग अपने छोटे उद्यम से अलग हो गए थे।हालांकि सरकार ने बेरोजगारी की समस्या को दूर करने के लिए मेक इन इंडिया स्किल इंडिया और मुद्रा योजना जैसे कई सराहनीय कदम उठाए हैं पर कहीं न कहीं हालिया आंकड़े तो यही कहते हैं कि अभी भी इन योजनाओं को सही तरीके से लागू करना बाकी है।
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भारतीय जन संचार संस्थान , नई दिल्ली से अभिषेक नंदन की रिपोर्ट .

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