भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि ,” सबकुछ प्रतीक्षा कर सकता है, पर कृषि नहीं”। रबी की फसल अपने अंतिम स्थिति में खेतो में है। गेंहू, तिलहन की फसलें खेतों में पक रही हैं। लेकिन पूरे उत्तर भारत में बेमौसम बारिश, आंधी और ओलावृष्टि के कारण बहुत बड़े क्षेत्र में फसलों की बर्बादी से किसानों का एक बड़ा वर्ग प्रभावित हुआ है।
एक खबर के मुताबिक़ कई किसानों का मानना है कि इस मौसम में उन्होंने इतने बड़े-बड़े ओले गिरते हुए कभी नहीं देखे। ऐसा कभी नहीं हुआ कि 15-20 मिनट की बारिश में फसलों का इतना बड़ा नुकसान हुआ हो।
वे लोग जिनकी पूंजी छत के नीचे सुरक्षित है वे ओले के साथ अपनी तस्वीरों को सोशल मीडिया पर डाल रहे हैं। ख़ुशी के साथ। लेकिन ठीक उसी समय में उसी ओले की वजह से किसानों का एक बड़ा वर्ग रो रहा है।
भारत में 42 फीसदी लोगों को रोजगार देने वाले कृषि क्षेत्र की हालत मौजूदा समय में ठीक नहीं है। पहले मंदी और अब बेमौसम बारिश ने उनकी हालत खस्ता कर दी है। मंदी की वजह से किसान कर्ज में डूबे हुए हैं। रबी की फसल से कुछ उम्मीद थी कि वे आर्थिक तंगी से कुछ उबर पाएंगे लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ कृषि में सकल मूल्य 14 साल में सबसे कम है। आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण भारत की अधिकतर आबादी आज भी पेट पालने के लिए खेती-किसानी पर निर्भर है।
अंग्रेजी वेबसाइट द पायनियर में छपी एक खबर के मुताबिक भारत मौसम विभाग (आईएमडी) ने अंदेशा जताया है कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के चलते रबी की फसलों का उत्पादन कम हो सकता है। मंदी की वजह से पहले ही वर्ष 2018-19 में ग्रामीण भारत में 91 लाख नौकरियां कम हुई हैं। बेमौसम बारिश से ग्रामीण भारत की स्थिति और ज्यादा दयनीय हो जाएगी।
एक तरफ भारत सरकार लगातार कह रही है कि वर्ष 2022 तक वह किसानों की आय दोगुनी कर देगी। लेकिन पूर्ववर्ती स्थितियों को देखे तो सरकारें कभी भी किसानों को लेकर गंभीर नहीं दिखी है मुआवजे के नाम पर किसानों को पंद्रह रुपये, बीस रुपये के चेक मिलने की खबरें लगातार आती रही हैं।
डाउन टू अर्थ में की रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि क्षेत्र में यह दूसरा साल है जब कोई विकास दर्ज नहीं की गई है। हालांकि, वर्ष 2019 -20 में इसके 2.8 फीसदी विकास की उम्मीद है। पिछले वित्त वर्ष में यह विकास दर 2.9 फीसदी थी। इस तरह हम कह सकते हैं कि वर्ष 2019 -20 में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
बड़े किसानों के पास तो पहले से अनाज होते हैं वे तो इस मौसम की मार झेल लेते हैं। लेकिन छोटे और मझोले किसानों को एक मौसम में फसल बर्बादी से उबरने में सालों लग जाते हैं।
एक आंकड़े की मानें तो भारत में चालू वित्त वर्ष में पांच प्रतिशत जीडीपी का विकास होगा। यह विकास दर 11 साल में सबसे कम आंकी गई है। मंदी की मार सभी क्षेत्र झेल रहे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा चिंता की बात किसानों के लिए है।
मौजूदा समय की स्थिति को देखे तो भारत सरकार संशोधित नागरिकता कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर(एनआरसी) और एनपीआर के जरिए हिन्दू-मुसलमान के मुद्दों पर केंद्रित दिख रही है। पर चुनाव के समय किसानों के नाम पर वोट पाकर सत्ता में आने वाली सरकारें सत्ता के नशे में चूर होने के बाद किसानों को उनके यथास्थिति पर छोड़ देती है। अब उस वादे को देखना है जिसके अनुसार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी होगी।
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