भरत का असली नाम संजय जोग है। बिल्होरी आंखें, शांत स्वाभाव, भैया के प्रिय और माता-पिता के सम्मान में तत्पर भरत के बारे में लोग कम ही जानते हैं। 40 साल की उम्र में लीवर की बीमारी से दुनिया को विदा कहने वाले संजय रामायण में सदा के लिए अमर तो हो गए पर लोगों को उनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।
संजय जोग का जन्म 24 सितंबर1955 में नागपुर महाराष्ट्र में हुआ था। संजय पढ़ लिख कर एयरफोर्स में पायलट बनना चाहते थे। उन्होंने अपनी BSc. मुंबई के एल्फिंस्टोन कॉलेज से पूरी की थी। 1971 में भारत पाक युद्ध में इनके एक रिश्तेदार की मृत्यु हो गई जिसके बाद इनके परिवार ने इन्हें एयरफोर्स में जाने की इज़ाजत नहीं दी।
पढ़ने लिखने में होशियार तो थे ही फिल्मालया से एक्टिंग कोर्स भी कर लिया। हिंदी इंग्लिश के अलावा पांच अन्य भाषा के जानकार थे। इन्होंने अपना फिल्मी करियर मराठी फिल्म 'सांपला' से शुरू किया जो ज्यादा नहीं चली। उसके बाद ये नागपुर आकर खेती करने लग गए। थोड़े समय बाद किस्मत ने करवट ली और इन्हें एक मल्टी स्टारर फिल्म 'जिद्द' में काम करने का मौका मिल गया। फिल्म सुपरहिट रही।
तो इतनी बढ़िया फिल्मों में काम करने के बाद ये राम के भरत कैसे बने। रामायण करने से पहले ये एक गुजराती फिल्म 'मायाबाज़ार' में काम कर रहे थे जिसमें इन्होंने 'अभिमन्यु' का किरदार निभाया था। कमाल की बात ये थी कि फिल्म में उनका मेकअप करने वाले गोपाल दादा रामायण में भी मेकअप मैन थे। उन्होंने ही संजय को रामानंद सागर से मिलने का सुझाव दिया। रामानंद सागर ने इन्हें पहले लक्ष्मण का किरदार दिया पर अपने काम की व्यस्तता की वजह से इन्होंने करने से मना कर दिया। फिर रामानंद सागर ने इन्हें भरत का किरदार करने के लिए कहा जिसे ये मना नहीं कर पाए। इसके बाद क्या हुआ ये तो सभी जानते हैं। आज भी भरत की आंखों में आंसू देखकर कठोर से कठोर आदमी का दिल पिघल जाता है।
इनकी शादी नीता जी से हुई। जो एक वकील थीं। इनके दो बच्चे हुए रणजीत और नताशा। संजय का सपना था कि फिल्मी करियर से विदा लेने के बाद पुणे में कुछ जमीन लेकर खेतीबाड़ी करेंगे। वो अपना ये सपना पूरा कर पाते इससे पहले 27 नवंबर 1995, 40 साल की उम्र में लीवर फेल होने कसी वजह से इन्होंने दुनिया से विदा ले लिया। संजय जी के देहांत के समय उनके बेटे रणजीत हाई स्कूल में थे। उनकी पत्नी नागपुर चली आईं और वकालत फिर से शुरू की और अपने बच्चों को सफल बनाया।
1994 में आई 'बेटा' फिल्म इनकी अंतिम फिल्म थी। पूरे जीवन में इन्होंने लगभग 50 से अधिक फिल्मों में काम किया था। विडंबना की बात ये है कि 90 के दशक के इस जाने माने हीरो को इतनी आसानी से भूला दिया गया। शायद यही वजह की इनके बारे में सटीक जानकारी की जगह अफवाहें ज्यादा हैं। अपने पिता की पहचान और नाम को आगे बढ़ाते हुए इनके बेटे रणजीत जोग मराठी जगत के एक जाने माने अभिनेता हैं। भरत का किरदार लोगों के लिए महज एक किरदार होगा पर संजय जोग मानो बिना किसी मिलावट के पर्दे पर खुद को प्रस्तुत कर रहे थे। एक सीधे सादे खास कलाकार संजय जोग-राम के भरत।



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