रामायण के दशरथ वो अभागे पिता जो अपने वचन और पुत्र मोह के घेरे में ऐसे फंसे की मौत उन्हें संसार से मुक्ति दिला पाई। रामानंद सागर की रामायण में दशरथ का किरदार निभाया था बाल धुरी ने। बाल धुरी मराठी रंगमंच के एक जाने माने अभिनेता और एक मंझे हुए कलाकार हैं।
बाल धुरी का जन्म महाराष्ट्र में सन् 1944 में हुआ। बाल धुरी का असली नाम भैयूजी है पर घर में सब लोग बाल कहकर पुकारते थे इसलिए खुद ही अपना नाम बाल रख लिया। बाल धुरी के घरवाले उनके एक्टिंग के शौक के खिलाफ थे। उस जमाने में बाल धुरी ने इंजीनियरिंग पढ़ाई की थी। अच्छी नौकरी भी मिल गई लेकिन एक्टिंग का जुनून सिर चढ़कर बोल रहा था। परिवार वालों ने जब उनके इस शौक का विरोध किया तो नौकरी छोड़ दी। पहली मराठी फिल्म 'देवाचिए द्वारी' से एक्टिंग में डेब्यू किया।
जयश्री गडकर यानी रामायण की कौशल्या भी मराठी थिएटर की एक जानी मानी कलाकार हैं। 1950 से 1980 के दशक में उन्होंने पर्दे पर खूब राज किया। बाल धुरी और जयश्री मानो एक दुजे के लिए ही बने थे।
जयश्री मराठी फिल्मों का जाना माना चेहरा थीं इसलिए रामानंद सागर ने उन्हें पहले ही कौशल्या के किरदार के लिए चुन लिया था। जब जयश्री सीरियल को लेकर एक बार रामानंद से मिलने गई थीं तो बाल धुरी भी उनके साथ थे। रामानंद ने पहली बार बाल धुरी को देखा और पता चला कि ये भी मंझे हुए कलाकार हैं तो फटाक से मेघनाथ का रोल थमा दिया। बाल धुरी ने मेघनाथ का रोल करने से मना कर दिया और दशरथ का किरदार करने की इच्छा जताई। रामानंद सागर बहुत हैरान हुए क्योंकि दशरथ का किरदार तो शुरुआत के कुछ एपिसोड में ही खत्म हो जाता है। खैर इसके बाद बाल धुरी ने दशरथ का वो अमर किरदार निभाकर पर्दे पर सदा के लिए खुद को अमर कर लिया। रामायण के बाद जहां भी पति-पत्नी दोनों जाते लोग राजा दशरथ और माता कौशल्या कहकर अभिवादन करते थे।
रामायण से जुड़ा एक बहुत ही प्रसिद्ध किस्सा है। सीरियल में राजा दशरथ का निधन हो जाता है उन्हें चिता पर लेटाया जाता है पर कौशल्या यानी जयश्री वो रोल करने से मना कर देती हैं। वो अपने पति को चिता पर नहीं देखना चाहती थीं तभी बाल धुरी ने जैसे-तैसे उन्हें उस सीन के लिए मनाया जिसके बाद वो सीन शूट करने के लिए तैयार हुई।
दोनों का साथ 29अगस्त2008 को जयश्री की मृत्यु के बाद छूट जरूर गया पर पति-पत्नी का कभी न खत्म होने वाला वो अटूट रिश्ता आज भी राजा दशरथ और माता कौशल्या के रूप में पर्दे पर अमर है।



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