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Thursday, May 28, 2020

दामाद और ज्येष्ठ पुत्रों का पर्व है - 'जमाई शोष्टि'



पारिवारिक संबंधों का स्वाद सामाजिक रीति-रिवाजों के माध्यम से व्यक्त किया जाता है। हम भारतीयों के पास बहुत सारे रीति-रिवाज हैं जो परिवार के संबंध की अभिव्यक्ति को और भी अधिक प्रमुख बनाते हैं।

बंगाली समाज के दुर्गा पूजा की चर्चा तो देशभर में होती है। शादी-विवाह में भी इनके रीति-रिवाज दूसरे समुदायों से बहुत भिन्न लेकिन आकर्षक होते हैं।

लेकिन बंगाली समुदाय का ऐसा पर्व भी है जिसे 'दामाद दिवस' कहा जाता है। जी हां, एक ऐसा दिन जो विशेष रूप से दामाद को समर्पित है।



'जमाई षष्ठी' (दामाद दिवस), जिसे मूल लहजे में 'जमाई शोष्टि' कहा जाता है, बंगाली समुदाय के लिए एक पारंपरिक बंगाली त्योहार के रूप में महत्वपूर्ण दिन है। यह ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में छठे दिन मनाया जाता है। 2020 में, जमाई शास्त्री 28 मई को, यानी आज है।

जमाई षष्टी के अवसर पर, दामाद को ससुर के निवास पर आमंत्रित किया जाता है और विशेष व्यंजनों की पेशकश की जाती है। इस विशेष पूजा की तैयारी एक दिन पहले से शुरू हो जाती है। विशाल दावत और उपहारों का आदान-प्रदान इस त्योहार का प्रमुख हिस्सा है। दामाद का उसके ससुराल वालों द्वारा भव्य तरीके से व्यवहार किया जाता है।

यह रिवाज़ एक मजबूत पारिवारिक बंधन की नींव रखता है और दामाद को अपने ससुराल को बेहतर तरीके से जानने का मौका भी मिलता है।

जमाई षष्ठी को देवी षष्ठी की पूजा के लिए समर्पित किया जाता है, जिसे युगल, बच्चों और पूरे परिवार का रक्षक माना जाता है।



'जमाई शोष्टि' पर्व को बंगाली समुदाय की सुहागिनें 'वट सावित्री पूजन' की तरह मनाती है। वधु पक्ष की ओर से बेटी-दामाद के लिए नये कपड़े भेजे जाते हैं। जिसे पहनकर सुहागिनों के द्वारा पीपल वृक्ष के नीचे सुहाग की रक्षा की मनोकामना को लेकर रक्षा सूत्र बांधा जाता है। बांस के बने पंखों से पहले पीपल वृक्ष और फिर अपने पति को पंखों से हवा की जाती है।

यह त्योहार जमाई के अलावा बच्चों के लिए भी होता है, इस पर्व में ज्येष्ठ पुत्र को सबसे पहले बड़े कटोरे में प्रसाद दिया जाता है और उसके बाद शेष बच्चों को बरगद के पत्तों से बने दौनों में प्रसाद दिया जाता है।

जमाई षष्टी पर व्रत कथा एवं सभी अनुष्ठान करने के बाद, एक पीला धागा कलाई पर बांधा जाता है और इसके बाद सभी के बीच प्रसाद वितरित किया जाता है। इस त्योहार में अनेक प्रकार के फलों और मिष्ठानों का महत्व है।

जमाई षष्टी व्रत कथा तीन बेटों और तीन बेटियों के परिवार से जुड़ी हुई है और मुख्य कहानी सबसे छोटी बहू के साथ संबंधित है।
(- कड़क मिजाज, आलोक चटर्जी)

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